चंडीगढ़ के राम दरबार क्षेत्र में सूफी संत बाबा रुकुद्दीन और माता राम बाई जी अम्मी हुज़ूर शाहंशाह के उर्स-ए-मुबारक के अवसर पर एक भव्य धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन आस्था, प्रेम और भाईचारे का सुंदर संगम बना।
इस पावन अवसर पर दूर-दराज़ से आए अकीदतमंदों ने बड़ी संख्या में शिरकत की। दरगाह परिसर में श्रद्धा और भक्ति का माहौल देखने को मिला, जहां हर चेहरा सुकून और शांति से भरा हुआ था।
कार्यक्रम के दौरान सूफी कव्वाली और कलाम की प्रस्तुतियों ने समा बांध दिया। अल्लाह और सूफी संतों की शान में पेश किए गए कलाम ने श्रोताओं के दिलों को गहराई से छू लिया।
उर्स के मौके पर चादरपोशी और दुआओं का विशेष आयोजन किया गया। लोगों ने देश में अमन, शांति और खुशहाली के लिए दुआ मांगी और एक-दूसरे के लिए नेक ख्वाहिशें जताईं।
माता राम बाई चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से इस कार्यक्रम को बेहद सुव्यवस्थित और गरिमापूर्ण ढंग से आयोजित किया गया। ट्रस्ट के सदस्यों ने सेवा भाव से सभी व्यवस्थाओं को संभाला।
कार्यक्रम में सामाजिक सद्भाव और आपसी भाईचारे का संदेश स्पष्ट रूप से देखने को मिला। अलग-अलग समुदायों के लोग एक साथ बैठकर इस आध्यात्मिक आयोजन का हिस्सा बने।
उर्स के दौरान लंगर और प्रसाद की व्यवस्था भी की गई, जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने प्रेमपूर्वक भाग लिया। सेवा और इंसानियत का यह भाव आयोजन की विशेष पहचान रहा।
सूफी परंपरा की यह झलक युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बनी। कार्यक्रम ने प्रेम, सहिष्णुता और मानवता के मूल्यों को मजबूती से प्रस्तुत किया।
स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आए मेहमानों ने भी आयोजन की सराहना की। सभी ने इसे आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर और मन को शांति देने वाला अनुभव बताया।
उर्स-ए-मुबारक का यह आयोजन चंडीगढ़ के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन में एक यादगार अध्याय बन गया, जो आने वाले समय में भी लोगों के दिलों में अपनी छाप छोड़ेगा।

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